हरिद्वार। “जब बाड़ ही खेत को खाए तो रखवाली कौन करे” यह कहावत ऊर्जा विभाग पर फिट बैठती है। ऐसे इसलिए क्यूंकि बिजली चोरी रोकने की जिम्मेदारी जिनके ऊपर है वही बिजली चोरी करा रहे है। इस प्रकार जहां एक ओर ऊर्जा विभाग बिजली चोरी को रोकने के लिए अभियान चलाए हुए है तो वहीं दूसरी ओर उनके ही कर्मचारी बिजली चोरी करा रहे है। ताज़ा मामला उपखंड जगजीतपुर क्षेत्र का है। ज़ब विभाग की टीम बिजली चोरी के खिलाफ कार्रवाई को पहुंची तो दो निर्माणाधीन मकानों में बिजली चोरी होते हुए मिली। चोरी कराने में एसएसओ का नाम सामने आया। जिसके बाद एसडीओ जगजीतपुर द्वारा दोनों मकानमालिकों की चेकिंग रिपोर्ट में एसएसओ का नाम भी शामिल कर दिया गया। एसडीओ की कार्रवाई से ऐसे कर्मचारियों को कड़ा संदेश मिला है जो विभाग को अंदर से नुकसान पहुंचा रहे है।

गौरतलब है कि बिजली चोरी के खिलाफ ऊर्जा विभाग लगातार अभियान चला रहा है। अभियान में विभाग को कुछ हद तक सफलता भी हाथ लग रही है। शहर में बिजली चोरी कम हुई है। लेकिन उपखंड जगजीतपुर कार्यालय से टीम बिजली चोरी की शिकायत पर ज़ब ट्रांसपोर्ट नगर स्थित विष्णु लोक कॉलोनी पहुंची तो उनके होश उड़ गए। टीम ने ज़ब दो निर्माणाधीन मकानों से चोरी पकड़ी तो चोरी कर रहे व्यक्तियों ने बताया कि एसएसओ महेश द्वारा पैसे लेकर बिजली की चोरी कराई जा रही है। यह सुन कर टीम हक्का बक्का रह गई। ज़ब एसएसओ से इस बारे में पूछा गया तो वह अपना पल्ला झाड़ता नज़र आया। जिसके बाद एसडीओ जगजीतपुर रुपेश कुमार ने मामले में कार्रवाई करते हुए दोनों मकानमालिकों सहित एसएसओ महेश के खिलाफ चेकिंग रिपोर्ट भर मामले की तहरीर थाने में दे दी। वहीं, अब बिजली चोरी करा रहे एसएसओ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई को लेकर मांग उठने लगी है। लोगों का कहना है कि विभाग चोरी करने वालों पर मोटा जुर्माना लगता है। साथ ही उनके घरों की विद्युत सप्लाई तक बंद कर देता है। ऐसे ही चोरी करा रहे कर्मचारी पर भी कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। जिससे बिजली चोरी कराने वाले कर्मचारियों पर लगाम लग सके।
एसडीओ रुपेश की कार्रवाई को जनता ने सराहा…
हरिद्वार। चोरी करने वालों के साथ-साथ चोरी करा रहे कर्मचारी को न बचाते हुए उसका नाम भी चेकिंग रिपोर्ट में भरने को लेकर एसडीओ जगजीतपुर रुपेश कुमार की सरहाना शहरभर में हो रही है। अक्सर अधिकारी अपने कर्मचारियों को बचाने के लिए उनके कारनामो पर पर्दा डालते नज़र आते है। लेकिन इसके विपरीत एसडीओ रुपेश ने ईमानदारी और पद की गरिमा का ख्याल रखते हुए कर्मचारी के खिलाफ भी कार्रवाई की। जिसके बाद से ऐसे कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है जो बिजली चोरी कराने में शामिल रहते है या फिर अवैध वसूली करते है।
