संतो की सर्वोच्च संस्था का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा
सनातन परंपरा को कमजोर करने की हर कोशिश का डटकर विरोध किया जाएगा
अखाड़ों से ही है संतों का अस्तित्व
परंपरांओं और मर्यादाओं का ज्ञान नहीं रखने वाले लोग कर रहे विरोध
अर्द्धकुंभ को कुंभ की तर्ज पर मनाने में किसी को दिक्कत नही होनी चाहिए
अखाड़ा परिषद के दोनों अध्यक्ष कुंभ से पहले निपटाएं समस्या
हरिद्वार। विश्व सनातन पीठ के संस्थापक अध्यक्ष एवं अखिल भारतीय वैष्णव अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री बाबा हठयोगी ने अखाड़ा परिषद पर बयानबाजी करने वालों को कड़ी चेतावनी जारी की है। प्रैस को जारी बयान में बाबा हठयोगी ने कहा कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद भारत के संतांे की सर्वोच्च संस्था है। अखाड़ा परिषद के खिलाफ षड्यंत्र रचकर बयानबाजी और किसी भी तरह का अपमान या प्रोपेगेंडा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बाबा हठयोगी ने कहा कि सनातन परंपरा को कमजोर करने की हर कोशिश का डटकर विरोध किया जाएगा और अखाड़ा परिषद की गरिमा एवं प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि विरोध किसी व्यक्ति विशेष का हो सकता है। लेकिन अखाड़ा एक पहाड़ के समान है और सनातन की सर्वोच्च संस्था है। जिसका विरोध करना सनातन की परंपराओं का विरोध करने के बराबर है। उन्होेंने बताया कि अखाड़ा परिषद का गठन 1954 में हुआ था। तब से आज तक परिषद कुंभ और महाकुंभ जैसे दिव्य आयोजनों मे अहम भूमिका निभा रही है। परिषद इसके साथ अखाडों के हित में भी अनेक कार्य करती है। ऐसी संस्था की निंदा या बयानबाजी करना चिंता का विषय तथा निंदनीय है। किसी भी संत महंत को बोलने से पहले सोचना चाहिए। जितने भी संत, महंत, महामंडलेश्वर हैं। सभी का अस्तित्व अखाड़े से ही है। यदि अखाड़े मुंह फेर ले तो इनका अस्तित्व अपने आप स्वतः समाप्त हो जाएगा।
बाबा हठयोगी ने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि आज ऐसे लोग बयान बाजी कर रहे हैं। जिन्हें ना तो परंपराओं का ज्ञान है और ना मर्यादा की सीमा का पता है। यह लोग अज्ञानता के कारण इस तरह का प्रचार प्रसार कर रहे हैं, जो उनकी मूर्खता को दर्शाता है। बाबा हठयोगी ने यह भी कहा कि यदि सरकार चाहती है कि अर्ध कुंभ महाकुंभ की तर्ज पर हो तो अखाड़े सरकार के प्रस्ताव का समर्थन करते हैं और परंपराओं का निर्वाह करते हुए अखाड़े बैंड बाजो के साथ पूर्ण रूप से इस आयोजन में सम्मिलित होकर स्नान भी करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि सरकार अर्धकुम्भ कों कुम्भ की तर्ज पर मनाने का प्रयास कर रही है तो इसमें किसी कों दिक्कत या परेशानी नहीं होनी चाहिए। यह एक अच्छी पहल है। क्योंकि अर्ध कुंभ और महाकुंभ जैसे दिव्य आयोजन आदि अनादि काल से होते आ रहे हैं और इन पर सवाल उठाना या टिप्पणी करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि दो अखाड़ा परिषदों के बीच जो विवाद चल रहा है। उनका मानना है कि जिस तरह की बयानबाजी हो रही है। लोग उसी का फायदा उठा रहे हैं। उन्होंने अखाड़ा परिषद के दोनों अध्यक्षों से कुंभ से पहले इस समस्या का मिल बैठकर समाधान निकालने का आग्रह करते हुए कहा कि अखाड़ा परिषद को एक नई ऊर्जा के साथ बड़ी ताकत बनाएं।
