माता-पिता की चिंता दूर कर आयु-अनुरूप कराया नामांकन, अब नियमित स्कूल जा रही हैं दोनों बालिकाएं
बहराइच। शिक्षा से वंचित बालिकाओं को स्कूल तक पहुंचाने में शिक्षकों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है, इसकी मिसाल प्राथमिक विद्यालय बारा निजाम के प्रधानाध्यापक अनिल कुमार सिंह ने पेश की है। एजुकेट गर्ल्स संस्था की फील्ड कॉर्डिनेटर मिथिलेश कुमारी के साथ मिलकर उन्होंने दो आउट ऑफ स्कूल बालिकाओं को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई।
एजुकेट गर्ल्स संस्था की ओर से क्षेत्र में गृह-संपर्क अभियान के दौरान ऐसी कई बालिकाएं सामने आईं, जो आर्थिक और पारिवारिक परिस्थितियों के चलते स्कूल नहीं जा रही थीं। बारा निजाम गांव में भी कुछ बालिकाओं के अभिभावकों ने बताया कि मदरसा स्कूल में पढ़ाई अपेक्षित स्तर पर नहीं हो रही है और निजी विद्यालय की फीस वहन करना उनके लिए संभव नहीं है।
संस्था की ओर से अभिभावकों को ‘ज्ञान का पिटारा’ कार्यक्रम की जानकारी दी गई। हालांकि, अभिभावकों के मन में यह चिंता थी कि कार्यक्रम सीमित अवधि का है, उसके बाद उनकी बेटियों की पढ़ाई कैसे जारी रहेगी। इसी चिंता को दूर करने के लिए फील्ड कॉर्डिनेटर मिथिलेश कुमारी ने प्राथमिक विद्यालय बारा निजाम के प्रधानाध्यापक अनिल कुमार सिंह से संपर्क किया।
प्रधानाध्यापक ने अभिभावकों को भरोसा दिलाने के लिए स्वयं उनके घर जाने का निर्णय लिया। अगले दिन उन्होंने तपती दोपहरी में संस्था की कार्यकर्ता के साथ गली-गली और घर-घर जाकर अभिभावकों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि ये बालिकाएं भी विद्यालय और समाज की जिम्मेदारी हैं तथा विद्यालय में उन्हें बेहतर शिक्षा और पूरा सहयोग दिया जाएगा।
प्रधानाध्यापक की इस पहल और संस्था के प्रयासों से दो आउट ऑफ स्कूल बालिकाओं का आयु-अनुरूप सफल नामांकन प्राथमिक विद्यालय बारा निजाम में कराया गया। नामांकन के बाद दोनों बालिकाएं अब नियमित रूप से विद्यालय जा रही हैं।
एजुकेट गर्ल्स की फील्ड कॉर्डिनेटर मिथिलेश कुमारी ने प्रधानाध्यापक अनिल कुमार सिंह के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जब शिक्षक और सामाजिक संस्थाएं मिलकर प्रयास करते हैं तो शिक्षा से वंचित बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ना आसान हो जाता है। उन्होंने कहा कि प्रधानाध्यापक की संवेदनशीलता और सकारात्मक पहल बालिका शिक्षा के क्षेत्र में प्रेरणादायक उदाहरण है।
शिक्षा की अलख जगा रहे प्रधानाध्यापक अनिल कुमार सिंह, दो बालिकाओं को दिलाया स्कूल में प्रवेश
