सिडकुल। भेल लेडीज क्लब में कार्यरत कर्मचारियों ने अपनी सेवा शर्तों, अधिकारों और विभागीय नीतियों को लेकर प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारियों का आरोप है कि लंबे समय से उनकी जायज मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे उनके भीतर अपनी पहचान और भविष्य को लेकर गहरा असंतोष है। कर्मचारियों का कहना है कि उनका सरकारी पीएफ नियमित रूप से कटता है। इसके बावजूद, उनकी सेवानिवृत्ति की आयु मात्र 58 वर्ष तय की गई है, जबकि भेल के अन्य सभी विभागों में यह आयु सीमा 60 वर्ष है। कर्मचारियों ने इस दोहरे मानदंड पर कड़ा ऐतराज जताया है।
कहना है कि बढ़ती महंगाई के इस दौर में कर्मचारी आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। उनका आरोप है कि पिछले कई वर्षों से उनके महंगाई भत्ते और मूल वेतन में कोई उचित वृद्धि नहीं की गई है, जिसके कारण दैनिक खर्चों को पूरा करना भी अब एक बड़ी चुनौती बन गया है। कर्मचारियों ने प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें विभागीय नियमों और नियमित प्रक्रियाओं से जानबूझकर वंचित रखा गया है। विभाग में किसी भी प्रकार का स्पष्ट सर्कुलर या लिखित नीतियाँ जारी नहीं की जाती हैं। उन्हें यह भी नहीं पता कि हमारे वास्तविक अधिकार क्या हैं, जिससे कर्मचारियों में अपनी पहचान को लेकर लगातार भ्रम बना हुआ है। कर्मचारियों के अनुसार, उन्होंने इन सभी समस्याओं के समाधान और स्पष्टीकरण के लिए कई बार संबंधित अधिकारियों के सामने अपनी बात रखी और लिखित जवाब मांगा। लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन मिला, कोई संतोषजनक उत्तर या कार्रवाई नहीं हुई। वही, अधिकारियों के उदासीन रवैये से तंग आकर अब भेल लेडीज क्लब के कर्मचारियों ने आर-पार की लड़ाई का मूड बना लिया है। उन्होंने प्रबंधन से मांग की है कि उनकी सेवा अवधि और सेवानिवृत्ति आयु की समीक्षा की जाए। वेतन, पीएफ और पेंशन से जुड़ी विसंगतियों को तुरंत दूर किया जाए। विभागीय नीतियों को लिखित रूप में सार्वजनिक कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। इस दौरान कौशल्या, रोशन, मीरा, काशो, बृजेश, नरेंद्र आदि मौजूद रहे।
