हरिद्वार। बिजली विभाग में इन दिनों एक ऐसा ट्रांसफर चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसने विभागीय कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। आदेश जारी हुए, फाइलें चलीं, हस्ताक्षर हुए और ट्रांसफर भी कर दिया गया, लेकिन कर्मचारी आज भी उसी स्थान पर पूरी शान से डटा हुआ है। विभागीय गलियारों में लोग तंज कसते हुए कह रहे हैं कि शायद ट्रांसफर सिर्फ कागजों का हुआ है, कर्मचारी का नहीं।
चर्चाओं के केंद्र में एक उपनल कर्मचारी है, जिसके खिलाफ लगातार शिकायतें मिलने के बाद अधिशासी अभियंता ने उसका स्थानांतरण कर दिया था। आरोप हैं कि नए बिजली कनेक्शनों से जुड़े मामलों और साइट निरीक्षण में उसकी भूमिका जरूरत से ज्यादा प्रभावशाली रही और वह उपभोक्ताओं से अवैध रूप से रिश्वत भी मांगता था। शिकायतों का सिलसिला बढ़ने पर कार्रवाई भी हुई, लेकिन कार्रवाई का असर जमीन पर कहीं दिखाई नहीं दे रहा।
विभागीय सूत्रों के अनुसार संबंधित उपनल कर्मचारी क्षेत्रीय जेई का सबसे भरोसेमंद और खासमखास माना जाता है। नए कनेक्शन, साइट निरीक्षण साथ ही जेई के अन्य कई महत्वपूर्ण कार्यों को वही अंजाम देता है। यहां तक कि लेनदेन से जुड़े मेटर भी वही संभालता है। कुल मिलाकर कहा जाए तो दोनों का भरोसे और अवैध कार्यों का “अटूट रिश्ता” है जिसको जुदा करना नामुमकिन साबित हो रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि ट्रांसफर आदेश जारी होने के बाद भी कर्मचारी को न तो कार्यमुक्त किया गया और न ही नए तैनाती स्थल पर भेजा गया। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर वह कौन सी ताकत है, जिसके आगे अधिशासी अभियंता के आदेश भी बेअसर साबित हो रहे हैं। विभागीय गलियारों में इस पूरे प्रकरण को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कर्मचारी के ट्रांसफर के बावजूद पुराने स्थान पर बने रहने से विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।
