हरिद्वार।सिडकुल पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली को प्रभावी बनाने और जनता को त्वरित न्याय दिलाने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक (नगर)अभय सिंह और एएसपी (सदर) सुश्री निशा यादव ने बुधवार,को थाना सिडकुल का अर्द्धवार्षिक निरीक्षण किया। इस दौरान दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने थाने की व्यवस्थाओं, अभिलेखों की स्थिति और लम्बित मामलों की गहन समीक्षा की।

निरीक्षण की शुरुआत में थाना परिसर, सीसीटीएनएस कार्यालय, मालखाना, कर्मचारी बैरिक और हवालात की बारीकी से जाँच की गई। अधिकारियों ने परिसर में साफ-सफाई की स्थिति को संतोषजनक पाया। सरकारी संपत्ति, अस्लाह-एम्यूनेशन, दंगा नियंत्रण उपकरण और आपदा प्रबंधन से जुड़े उपकरण सही और क्रियाशील स्थिति में पाए गए।

कार्यालय के समस्त अभिलेखों का गहन निरीक्षण किया गया, जो व्यवस्थित और अध्यावधिक पाए गए। एसपी सिटी ने कार्यालय स्टाफ से वायरलेस सेट के प्रयोग और कोड के संबंध में पूछताछ कर उनकी तकनीकी जानकारी को परखा।ऑनलाइन जीडी,आईआईएफ फॉर्मों और सीसीटीएनएस कार्यों को तत्काल अपडेट करने के निर्देश दिए गए।निरीक्षण का मुख्य फोकस लम्बित विवेचनाओं, शिकायती प्रार्थना पत्रों की जाँच और वारंटों की तामील पर रहा। अधिकारियों ने लंबित विवेचनाओं और शिकायत पत्रों का शीघ्र निस्तारण करने की अनिवार्यता पर जोर दिया।ASP सदर ने विशेष रूप से थानों के लम्बित मालों और मुकदमाती वाहनों के निस्तारण में तेजी लाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि मालखाने में जमा वाहनों और वस्तुओं का समय पर निस्तारण न होने से न केवल स्थान घेरता है, बल्कि कानूनी प्रक्रिया भी बाधित होती है।एसपी सिटी अभय सिंह ने निर्देश दिए,रिकॉर्ड को हर हाल में अध्यावधिक रखा जाए और पुलिसकर्मी अपनी कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाएं। वारंटों की तामील शत प्रतिशत सुनिश्चित की जाए।

जवानों की दक्षता परखने के लिए उनसे शस्त्र हैण्डलिंग का अभ्यास कराया गया और उनके शस्त्र ज्ञान की जाँच की गई। हेड मोहर्रिर को निर्देश दिया गया कि वे सभी जवानों को शस्त्रों की पूर्ण जानकारी दें और निरंतर शस्त्राभ्यास करवाते रहें।जनता के साथ व्यवहार के संबंध में अधिकारियों ने कड़े निर्देश दिए। आगंतुक कक्ष और महिला हेल्प डेस्क पर तैनात पुलिस कर्मियों को थाने आने वाले शिकायतकर्ताओं के साथ शालीनतापूर्वक व्यवहार करने और उनकी समस्याओं का त्वरित निराकरण करने को कहा गया।अंत में, अधिकारियों ने कर्मचारियों का सम्मेलन लेकर उनकी व्यक्तिगत और विभागीय समस्याओं को सुना और उनका निस्तारण किया। नशा तस्करी के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान को जीरो टॉलरेंस नीति के तहत जारी रखने और चौपाल के माध्यम से आमजन को नशे के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक करने के भी निर्देश दिए गए।
