हमज़ा राव।
हरिद्वार। पुलिस मॉडर्न स्कूल की प्रिंसिपल से रिश्वत मांगने के मामले में विजिलेंस की जकड़ में आए खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) बहादराबाद बृजपाल सिंह राठौर व प्रभारी बीआरसी/प्रधानाध्यापक मुकेश की जोड़ी पिछले काफ़ी समय से चर्चाओं में है। विभाग में व्याप्त चर्चाओं के अनुसार बीआरसी मुकेश की गिनती खंड शिक्षा अधिकारी के एकदम चहेते मास्टरों में होती थी। कहा तो ये भी जाता है कि बृजपाल के अधिकतर विभागीय काम मुकेश के माध्यम से ही होते थे। उन्ही के माध्यम से इस तरह के कार्यों को अंजाम दिया जाता था।

नए बीआरसी के आने के बाद भी बीईओ ने मुकेश को कार्यमुक्त नहीं किया था। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह उनके कितने खास थे। दोनों के विजिलेंस की गिरफ्त में आने के बाद शिक्षकों के प्रमाण पत्रों को लेकर हुई एसआईटी जांच को लेकर भी अब बड़े सवाल उठने लगे है? जांच में दोनों का अहम रोल रहा है। सूत्र बताते है कि उक्त जांच में बहुत बड़े स्तर पर रिश्वतखोरी हुई है। अब बीईओ की गिरफ्तारी के बाद फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्रों से अध्यापक बने मास्टर साहब का यह मामला भी सुर्खियों में है।
सेवा पंजीकरण में दुर्गम ब्लॉक देने का जिक्र फिर भी सुगम में तैनाती पर भी उठ रहे सवाल…

विजिलेंस की कार्रवाई के बाद कई तरह के सवाल उठने लगे है। खंड शिक्षा अधिकारी बृजपाल राठौर को नियुक्ति के समय दुर्गम ब्लॉक दिए जाने के जिक्र उनके सेवा पंजीकरण में किया गया था। लेकिन उनकी ऊंची पहुंच के चलते उनको हरिद्वार के महत्वपूर्ण ब्लॉक पर तैनाती दे दी गई। जिसके बाद से उनकी तैनाती को लेकर भी सवाल खडे होते रहे है। वहीं, आरटीई एडमिशन में भी निजी स्कूलों से सांठगांठ को लेकर पूर्व में वह चर्चा में रहे है। जिस कारण खंड क्षेत्र के करीब 1500 से अधिक बच्चे शिक्षा से वंचित रहे। कई निजी स्कूलों की वेबसाइट एडमिशन के दौरान बंद रही या फिर कुछ ही समय के लिए खोली गई।इस प्रकार गरीब बच्चे भी इस जोड़ी के चलते अच्छे स्कूलों में प्रवेश से वंचित कर दिए गए। अब विजिलेंस की इस बड़ी कार्रवाई के बाद नए-नए खुलासे सामने आ रहे हैं। देखने वाली बात यह होगी कि और कितने मामलों में बृजपाल राठौर और उनके सहयोगी प्रधानाध्यापक मुकेश की इस जोड़ी के कारनामों की कितनी लंबी फेहरिस्त बनती है। अब दोनों की सम्पत्तियों की जांच की भी मांग उठने लगी है।
