हरिद्वार। ज्वालापुर ऊर्जा निगम कार्यालय में दो दिनों तक चले हंगामे के मामले में नया मोड़ आ गया है। बिजली आपूर्ति बहाल करने के दौरान सरकारी कार्य में बाधा डालने, ऊर्जा निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों से अभद्रता, जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करने तथा कार्यालय में तोड़फोड़ के आरोप में रानीपुर कोतवाली पुलिस ने पांच नामजद समेत कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू कर दी है।
कोतवाली रानीपुर में दी गई तहरीर में ज्वालापुर-द्वितीय उपखंड की उपखंड अधिकारी (एसडीओ) अर्चना ने बताया कि 28 जून की रात भीषण गर्मी के चलते 33/11 केवी विद्युत उपकेंद्र ज्वालापुर-द्वितीय से जुड़े फीडर में तकनीकी खराबी आ गई थी। शिकायत मिलते ही विभागीय कर्मचारी बिजली आपूर्ति सुचारु करने में जुटे थे। इसी दौरान मुन्ना पुत्र डॉ. सुनील, रोहित सैनी, अनिल सैनी, सरजल और अमरीश समेत कुछ अज्ञात व्यक्ति डिवीजन कार्यालय परिसर में पहुंच गए और उपद्रव शुरू कर दिया।
तहरीर के अनुसार आरोपितों ने एसडीओ सहित विभागीय कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार किया। आरोप है कि इस दौरान कर्मचारियों के खिलाफ जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया गया तथा कार्यालय में तोड़फोड़ कर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। अधिकारियों द्वारा समझाने के बावजूद आरोपित नहीं माने और नशे की हालत में बार-बार सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न करते रहे, जिससे बिजली आपूर्ति बहाल करने का कार्य प्रभावित हुआ।
मामले की सूचना मिलने पर रानीपुर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित कराया। पुलिस सुरक्षा में विभागीय टीम ने मरम्मत कार्य पूरा कर विद्युत आपूर्ति सुचारु कराई। घटना के बाद एसडीओ अर्चना की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए रानीपुर पुलिस ने पांच नामजद और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने, लोक सेवक के साथ अभद्रता, अनुसूचित जाति के कर्मचारियों के प्रति जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करने, तोड़फोड़ सहित अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। सीओ सदर सुरेंद्र प्रसाद बलूनी ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर अग्रिम वैधानिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
