देहरादून। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार बागेश्वर में खड़िया खनन पर लगी रोक और उत्तराखंड हाईकोर्ट में उस पर चल रही लगातार सुनवाई के बीच मामले ने नया और गंभीर मोड़ ले लिया है। बताया जा रहा है कि जिन 29 खड़िया माइंस को सभी नियमों के पालन का हवाला देकर पहले सुप्रीम कोर्ट में खुलवाया गया था, उनमें से किसी को भी जिला प्रशासन की ओर से “क्लीन चिट” नहीं दी गई थी।
सूत्र बताते हैं कि बागेश्वर के जिलाधिकारी द्वारा केवल स्टॉक वेरिफिकेशन से संबंधित रिपोर्ट भेजी गई थी, न कि खनन को नियमों के अनुरूप सही ठहराने वाली कोई रिपोर्ट। इसके बावजूद उच्चतम न्यायालय में तथ्यों को अलग ढंग से प्रस्तुत कर इन 29 माइंस को राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा पैरवी करते हुए खुलवाया गया।
जब यह पूरा मामला दोबारा उत्तराखंड उच्च न्यायालय के संज्ञान में आया तो अदालत ने खान अधिकारी बागेश्वर से जवाब तलब किया। सुनवाई के दौरान खान अधिकारी ने स्पष्ट रूप से अदालत को बताया कि किसी भी खदान को क्लीन चिट देने वाली कोई रिपोर्ट उनके स्तर से जारी नहीं की गई थी।
इसी बयान को सरकार के पक्ष के विपरीत माना जा रहा है। इसके बाद शासन स्तर पर कड़ी नाराजगी सामने आई है और खान अधिकारी से औपचारिक स्पष्टीकरण तलब कर लिया गया है कि उन्होंने किन परिस्थितियों में अदालत में यह रुख अपनाया। सूत्रों के मुताबिक, यह पूरा प्रकरण अब शासन बनाम अधिकारी के टकराव की शक्ल ले चुका है, जबकि दूसरी ओर खड़िया खनन से जुड़ी 29 माइंस का भविष्य एक बार फिर अधर में लटक गया है।
