अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव 2026 से विश्व शांति का संदेश, 80 देशों के 1200 से अधिक योग साधक होंगे शामिल

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में आयोजित होने वाले 38वें अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव 2026 के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस वर्ष लगभग 80 देशों से आए 1200 से अधिक योग साधक और योगाचार्य इस वैश्विक आध्यात्मिक आयोजन में सहभागिता करेंगे।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से महोत्सव की विशेषताएं साझा करते हुए बताया कि इस वर्ष 30 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों, उच्चायुक्तों और राजदूतों की गरिमामयी उपस्थिति भी रहेगी। महोत्सव में 150 से अधिक योग विधाओं का अभ्यास कराया जाएगा, जिससे प्रतिभागियों को योग, ध्यान और आध्यात्मिक साधना का दिव्य अनुभव प्राप्त होगा।
महोत्सव का विधिवत उद्घाटन 9 मार्च 2026 को पुष्कर सिंह धामी द्वारा किया जाएगा, जबकि 14 मार्च को गुरमीत सिंह अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। पूरे सप्ताह चलने वाले इस आयोजन में देश-विदेश के मंत्री, राजनयिक और विशिष्ट अतिथि भी शामिल होंगे।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध यह योग महोत्सव विश्व के प्रतिष्ठित मीडिया मंचों जैसे Time Magazine, The New York Times और CNN में भी व्यापक रूप से चर्चित रहा है। वर्ष 2017 में नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस महोत्सव का उद्घाटन किया था, जबकि 2018 में एम. वेंकैया नायडू ने प्रत्यक्ष रूप से इसमें भाग लिया था।
इस वर्ष महोत्सव में शिवा रिया, आनंद मेहरोत्रा, किया मिलर, स्टीवर्ट गिलक्रिस्ट, साध्वी आभा सरस्वती, डॉ. एच.आर. नागेन्द्र सहित कई अंतरराष्ट्रीय योग गुरुओं द्वारा योग सत्र, कार्यशालाएं और प्रवचन आयोजित किए जाएंगे।
संध्याकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रमों में कैलाश खेर और कैलासा बैंड, शिवमणि, रूना रिजवी, राधिका दास एंड फ्रेंड्स सहित कई प्रसिद्ध कलाकार भक्ति संगीत और कीर्तन प्रस्तुत करेंगे, जिससे हिमालय की गोद में आध्यात्मिक वातावरण और अधिक दिव्य हो जाएगा।
महोत्सव की पूर्व संध्या पर अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मां गंगा के तट पर विशेष गंगा आरती का आयोजन किया गया, जिसमें विश्व शांति और मानवता के कल्याण के लिए सामूहिक प्रार्थना की गई।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि आज जब विश्व संघर्ष और विभाजन की पीड़ा से जूझ रहा है, ऐसे समय में योग ही वह मार्ग है जो मानवता को शांति, सद्भाव और एकता की दिशा में आगे बढ़ा सकता है। वहीं साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि ऋषिकेश की पावन भूमि पर योग, गंगा और हिमालय की दिव्य ऊर्जा का अनुभव प्रतिभागियों को आत्मिक परिवर्तन की ओर प्रेरित करता है।
महोत्सव में प्रतिभागियों को कुंडलिनी योग, हठ योग, योग निद्रा, प्राणायाम, ध्यान, आयुर्वेद, ध्वनि चिकित्सा और भारतीय शास्त्रीय नृत्य-संगीत जैसे विषयों पर 150 से अधिक योग कक्षाओं और कार्यशालाओं में भाग लेने का अवसर मिलेगा।
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