भीषण गर्मी में परीक्षा देने को मजबूर छात्र, संस्कृत विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं पर उठे सवाल

हरिद्वार। उत्तराखंड में लगातार बढ़ रही भीषण गर्मी के बीच जहां जिला प्रशासन विद्यार्थियों के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर नजर आ रहा है, वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े होने लगे हैं। प्रशासन द्वारा स्कूलों के संचालन का समय सुबह 6:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक निर्धारित किए जाने और विद्यार्थियों को समय-समय पर पानी उपलब्ध कराने के निर्देशों के बावजूद विश्वविद्यालय में दोपहर की भीषण गर्मी में परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं।

विश्वविद्यालय में इन दिनों विभिन्न पाठ्यक्रमों की परीक्षाएं दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक कराई जा रही हैं। छात्रों का आरोप है कि परीक्षा कक्षों में न तो पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था है और न ही पंखे और एसी सही ढंग से काम कर रहे हैं। कई कमरों में पंखे बंद पड़े हैं, जबकि एसी केवल नाममात्र के लिए लगे हुए हैं। सबसे अधिक परेशानी पत्रकारिता विभाग की परीक्षा के दौरान सामने आई। छात्रों के अनुसार जिस कक्ष में उन्हें बैठाया गया वहां न तो एसी की व्यवस्था थी और न ही पर्याप्त पंखे लगे थे। उमस और तेज गर्मी से परेशान छात्रों ने जब विरोध जताया तो समस्या का समाधान करने के बजाय उन्हें दूसरे परीक्षा कक्ष में भेज दिया गया। आरोप है कि दूसरे कक्ष में पहले से ही परीक्षार्थी मौजूद थे, इसके बावजूद अतिरिक्त छात्रों को उसी कमरे में बैठा दिया गया। छात्रों का कहना है कि जिस कक्ष की क्षमता लगभग 50 से 60 विद्यार्थियों की थी, उसमें क्षमता से कहीं अधिक छात्रों को बैठाकर परीक्षा कराई गई। इससे घुटन और गर्मी और बढ़ गई तथा परीक्षा का माहौल भी प्रभावित हुआ। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि भीषण गर्मी में बिना मूलभूत सुविधाओं के परीक्षा कराना विद्यार्थियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। उनका कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया तो किसी छात्र की तबीयत बिगड़ने जैसी गंभीर स्थिति भी पैदा हो सकती है। छात्रों ने मांग की है कि सभी परीक्षा कक्षों में पंखे और एसी तत्काल दुरुस्त कराए जाएं, पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और गर्मी को देखते हुए परीक्षा समय में भी बदलाव किया जाए। छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

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