हरिद्वार। ऊर्जा निगम की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार सवाल किसी एक काम या एक डिवीजन का नहीं, बल्कि पूरे सर्किल के अधीन आने वाली कई डिवीजनों के कार्यों का जिम्मा एक ही ठेकेदार को सौंपे जाने को लेकर उठ रहा है। इतने बड़े कार्यक्षेत्र का काम एक ही ठेकेदार को दिए जाने से विभागीय व्यवस्था बिगड़ने व इसके साथ ही अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
चर्चा है कि ठेकेदार को उसकी वास्तविक क्षमता से कहीं अधिक काम सौंप दिया गया, जबकि काम के अनुपात में उसके पास पर्याप्त लेबर और संसाधन नहीं हैं। ऐसे में सवाल यह है कि जब ठेकेदार की क्षमता और संसाधन सीमित हैं तो पूरे सर्किल की कई डिवीजनों का काम आखिर उसके हवाले क्यों किया गया? क्यों अधिकारी एक ही ठेकेदार पर इतने मेहरबान है?
क्या है मामला…
ऊर्जा निगम में किसी ठेकेदार को काम देने से पहले उसकी तकनीकी क्षमता, मैनपावर, मशीनरी और पूर्व कार्यों का मूल्यांकन किया जाना चाहिए। लेकिन एक सर्किल कार्यालय से एक ही ठेकेदार को कई डिवीजनों का काम दिया जा रहा है जो कि सवालों के घेरे में है। जिसका एक प्रमुख कारण ठेकेदार की मनमानी, पर्याप्त संसाधन न होना व सुरक्षा मानको की अनदेखी करना है। ऐसे में कार्यों की गुणवत्ता, समयबद्धता और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है।
कागजों में मैनपावर, जमीन पर कर्मचारी कम…
सूत्रों के मुताबिक ठेकेदार के पास काम के अनुपात में पर्याप्त कर्मचारी नहीं हैं। कागजों में भले ही मैनपावर पूरा दिखाया जा रहा हो, लेकिन मौके पर कर्मचारियों की संख्या कम होने से कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता प्रभावित हो रही है। इसके बावजूद निगम के जिम्मेदार अधिकारी लापरवाह नजर आ रहे हैं।
गुणवत्ता पर सवाल…
ठेकेदार द्वारा कराए गए कुछ कार्यों की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप हैं कि कई जगह काम मानकों के अनुरूप नहीं हुआ और कुछ स्थानों पर सुरक्षा तथा गुणवत्ता से समझौता किया गया। इन आरोपों की निष्पक्ष तकनीकी जांच हो तो स्थिति साफ हो सकती है। लेकिन सवाल यह है कि जब शिकायतें और सवाल लगातार सामने आ रहे हैं, तब ऊर्जा निगम की ओर से ठेकेदार के खिलाफ कोई प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाया जा रहा?
कार्रवाई से क्यों बच रहा ऊर्जा निगम…
सबसे बड़ा सवाल ऊर्जा निगम के अधिकारियों की भूमिका को लेकर है। यदि ठेकेदार के खिलाफ शिकायतें हैं, मौके पर कमियां दिखाई दे रही हैं और सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो विभागीय स्तर पर जांच और कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही? क्या ठेकेदार को किसी उच्च अधिकारी का संरक्षण प्राप्त है?
