हरिद्वार। ऊर्जा निगम के ज्वालापुर डिवीजन में ठेकेदारों की मनमानी और विभागीय लापरवाही का मामला सामने आया है। आरोप है कि ठेकेदारों ने सुरक्षा मानकों को दरकिनार करते हुए कई स्थानों पर बिना अर्थिंग किए ही एसीबी (ACB) बॉक्स स्थापित कर दिए। इतना ही नहीं, कुछ स्थानों पर बॉक्स को स्थायी रूप से फिट करने के बजाय ईंटों के सहारे अस्थायी तरीके से खड़ा कर दिया गया है। बरसात के मौसम में इस तरह की लापरवाही किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है।

मामला ज्वालापुर डिवीजन के अधीन संचालित सब-डिवीजन-1 का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार सुभाषनगर और पांवधोई क्षेत्र में लगाए गए कई एसीबी बॉक्स का न तो विधिवत अर्थिंग कार्य किया गया और न ही उनका सुरक्षित इंस्टॉलेशन सुनिश्चित किया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इन बॉक्सों में करंट उतर गया तो राहगीरों और आसपास रहने वाले लोगों की जान जोखिम में पड़ सकती है।

स्थानीय नागरिकों ने सवाल उठाया है कि जब करोड़ों रुपये की विद्युत परियोजनाओं पर कार्य कराया जा रहा है तो विभागीय अधिकारी मौके पर निरीक्षण क्यों नहीं कर रहे। लोगों का आरोप है कि बिना गुणवत्ता जांच के ही ठेकेदारों का काम स्वीकार किया जा रहा है, जिससे सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी हो रही है।
ठेकेदार की मनमानी से मंडी का विकास भी ठप
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ठेकेदारों की कार्यशैली का असर केवल विद्युत सुरक्षा तक सीमित नहीं है। कृषि उत्पादन मंडी समिति, हरिद्वार में प्रस्तावित लाइन शिफ्टिंग का कार्य भी लंबे समय से अधर में लटका हुआ है। बताया जा रहा है कि विभागीय अधिकारियों के निर्देशों के बावजूद संबंधित ठेकेदार लाइन शिफ्टिंग का काम शुरू नहीं कर रहा है, जिससे मंडी में प्रस्तावित कई विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। मामले में कृषि उत्पादन मंडी समिति, हरिद्वार के सचिव लवकेश गिरी ने बताया कि लाइन शिफ्टिंग के लिए विभाग को समय पर प्रस्ताव भेजने के साथ निर्धारित धनराशि भी जमा करा दी गई थी। इसके बावजूद आज तक कार्य शुरू नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि इस संबंध में विभाग को कई बार पत्राचार भी किया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। परिणामस्वरूप मंडी के विकास कार्यों में लगातार देरी हो रही है।
बड़ा सवाल: जिम्मेदारी किसकी?
लगातार सामने आ रही शिकायतों ने ऊर्जा निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि ठेकेदार सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर रहे हैं और विभागीय अधिकारी निरीक्षण व निगरानी में विफल हैं, तो किसी संभावित दुर्घटना की जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी? बरसात के मौसम में बिना अर्थिंग वाले एसीबी बॉक्स लोगों की जान के लिए खतरा बन सकते हैं। ऐसे में आवश्यकता है कि ऊर्जा निगम तत्काल तकनीकी जांच कराए, दोषी ठेकेदारों पर कार्रवाई करे और सभी अधूरे व असुरक्षित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त कराए।
