देहरादून। सीबीआई के विशेष न्यायाधीश, देहरादून की अदालत ने बहुचर्चित बैंक धोखाधड़ी मामले में मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को दोषी करार दिया है। यह मामला उत्तराखंड ग्रामीण बैंक की बाजपुर शाखा से जुड़ा है, जिसमें करोड़ों रुपये के फर्जी कृषि ऋण स्वीकृत कर बैंक को भारी नुकसान पहुंचाया गया था।

क्या है पूरा मामला
सीबीआई ने 19 जून 2018 को यह मामला दर्ज किया था। यह कार्रवाई बैंक के तत्कालीन महाप्रबंधक सत्यपाल सिंह की 12 जून 2018 की शिकायत के आधार पर की गई थी। जांच में सामने आया कि वर्ष 2014-15 के दौरान तत्कालीन शाखा प्रबंधक राम अवतार सिंह दिनकर ने एक निजी ट्रैक्टर डीलर M/s K.G.N. Tractors and Equipments, बाजपुर के साथ मिलकर साजिश रची। इस साजिश के तहत फर्जी तरीके से KCC (फसल ऋण) और कृषि टर्म लोन स्वीकृत किए गए। बैंक की गाइडलाइन और प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया गया। फसल ऋण को ‘मार्जिन मनी’ के रूप में दिखाकर ट्रैक्टर लोन जारी किए गए। बिना किसी कृषि मशीनरी की खरीद के, धनराशि सीधे डीलर को ट्रांसफर कर दी गई इस पूरे घोटाले से बैंक को 3,39,94,657 रुपये का नुकसान हुआ। मामले में सीबीआई ने 24 दिसंबर 2018 को कुल 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी जिनमें एक सरकारी कर्मचारी, 16 निजी व्यक्ति शामिल थे। 09 अगस्त 2019 को कोर्ट ने सभी आरोपियों पर आरोप तय किए। ट्रायल के दौरान 2 आरोपियों (दत्तर सिंह और कश्मीर सिंह) की मृत्यु हो गई। 3 आरोपियों (मोहम्मद फुरकान, इरशाद हुसैन, इमामउद्दीन) ने अपराध स्वीकार कर लिया और उन्हें पहले ही सजा सुनाई जा चुकी है।

मंगलवार को अदालत ने शेष आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। मुख्य आरोपी बैंक मैनेजर राम अवतार सिंह दिनकर को IPC 120-B व IPC 420के तहत एक-एक वर्ष का कठोर कारावास व तीस हज़ार रूपए जुर्माना। इसके साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत 4 वर्ष कठोर कारावास व बीस हज़ार रूपए जुर्माना लगाया गया है। अन्य दोषी आरोपी राम सिंह, हरजीत सिंह, दीवान सिंह, हरदत्त सिंह, जसवीर सिंह, बलकार सिंह, पूरन चंद, दीदार सिंह, महेश कुमार, गुरदीप सिंह और सोना सिंह को दो वर्ष कठोर कारावास व तीस हज़ार रूपए जुर्माना लगाया गया है।
CBI की अपील
सीबीआई ने उत्तराखंड की जनता से अपील की है कि यदि किसी केंद्रीय विभाग या सार्वजनिक उपक्रम (PSU) के कर्मचारी द्वारा रिश्वत या अनुचित लाभ की मांग की जाती है, तो इसकी सूचना तुरंत CBI, ACB देहरादून को दें।

